Monday , December 10 2018
Breaking News
Home / ताजा खबर / प्रेम और भाईचारे का प्रतीक: क्रिसमस(Christmas) – उमेश कुमार साहू
Christmas

प्रेम और भाईचारे का प्रतीक: क्रिसमस(Christmas) – उमेश कुमार साहू

25 दिसंबर को न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में क्रिसमस(Christmas) का त्यौहार बड़ी धूमधाम से बनाया जाता है। ईसाई धर्म में क्रिसमस वर्ष का सबसे बड़ा त्यौहार होता है। इसी दिन गरीबों के मसीहा प्रभु ईसा मसीह का जन्म हुआ था। जितना उमंग व उल्लास ईसा मसीह का जन्म दिन मनाने वालों के चेहरे पर झलकता है, उससे कहीं अधिक उत्साह व उमंग इस पवित्रा धार्मिक पर्व को मनाने के रीति-रिवाजों में नजर आता है।

क्रिसमस का त्यौहार होता तो एक ही दिन का है, पर इसकी तैयारी कई दिन पहले से शुरू हो जाती है। घर की सुंदर सजावट, क्रिसमस ट्री और रोशनी से जगमगाता सितारा प्रभु ईसा मसीह के उपदेशों पर चलने की सभी को प्रेरणा देते हैं क्रिसमस मनाने के तरीके ईसाइयों के तीनों प्रमुख पंथों-कैथोलिक, प्रोटेस्टेंट और आर्थोडॉक्स में लगभग एक समान हैं।

क्रिसमस के दिन से पहले की रात यानी 24 दिसंबर को रात साढ़े दस बजे से चर्च में विशेष प्रार्थना व कैरल्स का आयोजन होने लगता है। यह क्रम एक घंटे तक चलता है। फिर क्रिसमस मास (विशेष प्रार्थना) व मिडनाइट मास होता है। तदोपरांत श्रद्धालुओं को चर्च के फादर ब्रेड व वाइन का प्रसाद देते हैं। प्रोटेस्टेंट पंथ में ब्रेड की जगह वेफर्स दिया जाता है। वाइन (अंगूरी शराब) के बारे में कहा जाता है कि इसमें प्रभु यीशु के रक्त की बूंदें मिली होती हैं। ध्यातव्य हो कि सलीब पर चढ़ाए जाने से पहले यीशु को भी शराब पेश की गई थी जिस पर उनके रक्तरंजित शरीर से रिस रहे खून की कुछ बूंदें गिरी थी।

प्रार्थना सभा के बाद सभी एक दूसरे को बधाइयां देते घर जाते हैं। दूसरे दिन सुबह लोग अपने परिचितों, संबंधियों को क्रिसमस केक व मिठाइयां खिलाते हैं। उपहारों का आदान-प्रदान होता है। पटाखे छोड़े जाते हैं और बच्चों को सांता क्लॉज ढेर सारे उपहार देते हैं। मुंबई, गोवा, केरल व उत्तरपूर्वी राज्यों में जहां ईसाई बहुतायत में है, क्रिसमस की रंगीनियां सड़कों व चौराहों पर भी दिखाई देती हैं पर बाकी जगहों में ईसाइयों के इस सबसे महत्वपूर्ण त्योहार का आयोजन गिरिजाघरों व लोगों के घरों तक ही सीमित रहता है।

ईसाई बहुल गोवा में क्रिसमस पर जमकर आतिशबाजी व नाच गाना होता है। मेले, कार्निवाल सजते हैं। लोग रात भर खुशियां मनाते है। कुछ लोग रात में ही चुपके से अपने सोते हुए बच्चों के सिरहाने पर प्यारा सा क्रिसमस का उपहार छोड़ देते है। युवा पीढ़ी के लिए तो अब क्रिसमस का पर्व दोस्तों से मिलने, तोहफे देने और मौजमस्ती का पर्याय बन गया है।

एक साधारण बढ़ई के घर पले-बढ़े प्रभु यीशु ने तीस साल की उम्र से लोगों को परमपिता परमेश्वर के दिव्य वचनों का उपदेश देना प्रारंभ कर दिया था। उन्होंने भक्तों से कहा-‘मैं इसलिए आया कि तुम्हें जीवन मिले और बहुतायत से मिले। यीशु गरीबों और बेसहारों के मसीहा थे। उन्होंने मूर्तिपूजा की जगह लोगों को निराकार परमेश्वर की पूजा का मार्ग बताया। वे लोगों को सांसारिक जीवन व्यतीत करते हुए भी परमेश्वर से निकटता बनाए रखने को प्रेरित किया करते थे। उनका मध्यम मार्ग का सिद्धांत तो आज भी प्रासंगिक है जिसके अनुसार इंसान अपनी इच्छाओं को काबू में रखकर ही मोक्ष प्राप्ति का लक्ष्य पा सकता है। (युवराज)

Check Also

narayan das ji

नारायण दास जी महाराज का शनिवार को हुआ देवलोकगमन

पद्मश्री विभूषित ब्रह्मपीठादीश्वर नारायण दास जी महाराज (त्रिवेणी धाम) का शनिवार को देवलोकगमन हो गया| सीकर जिले के …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *