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ved prakash vedik

देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियां और आमजन विषय पर संवाद कार्यक्रम आयोजित

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सीजे के संवाद कार्यक्रम में पत्रकारों से रूबरू हुए डॉ. वैदिक, विजय त्रिवेदी व जस्टिस दवे

जयपुर। आम चुनाव में मि-रु39यान मोदी के सहयोगी रहे एवं जाने माने वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वेद प्रताप वैदिक ने कहा है कि मोदी सरकार के चार साल का कार्यकाल निराशाजनक रहा है और यदि अब तक की अकर्मण्य सरकार अगले साल में कर्मण्य नहीं हुई तो इसे घातक परिणाम भुगतने पड़ेंगे। उन्होंने देश में शिक्षा, न्याय, राजनीति तथा विदेश सभी मामलों में मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया।

डॉ. वैदिक गुरुवार को यहां इंद्रलोक सभागार में कौंसिल ऑफ जर्नलिस्ट्स की ओर से आयोजित संवाद कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार श्रीपाल शक्तावत के साथ चर्चा कर रहे थे। देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियां और आमजन विषय पर आयोजित इस संवाद कार्यक्रम में डॉ. वैदिक के साथ वरिष्ठ पत्रकार विजय त्रिवेदी व जस्टिस विनोद शंकर दवे ने भी वर्तमान राजनीति पर अपने विचार पत्रकारों के साथ साझा किए।

डॉ. वैदिक ने कहा कि आज लोग जब उनसे ये पूछते हैं कि आपने किन लोगों को सत्ता में आने के लिए मदद की और उन सपनों का क्या रहा जो चुनाव से पहले दिखाए गए तो उनके पास कोई जवाब नहीं रह जाता। वर्तमान केन्द्र सरकार को शायद लगता है कि उसका देश में अभी कोई विकल्प नहीं है, लेकिन ये भी सच है कि जनता के समक्ष विकल्प आते देर नहीं लगती। चाहे विकल्प हो या न हो, यदि जनता के लिए ठोस काम नहीं किए तो सरकार पलटते देर नहीं लगेगी। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार आपातकाल से पहले लगता था कि इंदिरा गांधी का विकल्प नहीं है, लेकिन पता ही नहीं चला कि जनता ने उन्हें भी पटखनी दे दी। यदि वर्तमान राजनीति में कोई गैर दलीय व्यक्ति, जेपी आंदोलन की तरह , आगे आ जाए और अन्य सभी दल उसके साथ हो जाए तो 30 प्रतिशत जनता के वोट लेने वाली सरकार 10 प्रतिशत वोट के लिए भी तरस सकती है।

हालांकि वरिष्ठ पत्रकार शक्तावत के सवाल कि आप मोदी सरकार को 100 में से कितने नम्बर देंगे के जवाब में उन्होंने 40 अंक देकर सरकार को पास किया और कहा कि वे भी चाहते हैं कि आगामी साल में सरकार आमजन के लिए ठोस काम करे तो कुछ लाज बच सकती है।

उन्होंने माना कि भ्रष्टाचार के बिना राजनीति संभव नहीं है, फिर चाहे मोदी हो या मनमोहन। पानी में रहने वाली मछली पानी पिए बिना रह ही नहीं सकती।

शक्तावत के सवाल कि मोदी की तूफानी विदेश यात्राओं का क्या लाभ, के जवाब में उन्होंन कहा कि मोदी के विदेश में आयोजित कार्यक्रमों में भारतीयों की हजारों की भीड़ वहां के शासकों पर प्रभाव छोड़ती है, लेकिन इस यात्राओं का कोई ठोस लाभ भारतीय जनता को मिला हो, दिखाई नहीं पड़ता। उन्होंने मोदी की नोटबंदी को भी विफल बताते हुए कहा कि आज भी 85 प्रतिशत लोग मूलभूत आवश्यकताओं से महरूम है। सरकार को इनके उत्थान के लिए काम करना चाहिए, न कि आंकड़े गिनाकर मीडिया में प्रचार कराकर झूठी वाहवाही लूटी जाए।

वरिष्ठ पत्रकार विजय त्रिवेदी ने वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण दत्ता से चर्चा करते हुए कहा कि कारपोरेट्स से करोड़ों रुपए चंदे में लेने वाली पार्टियां वफादारी तो निभाएंगी ही। चुनावी चंदे में मिलने वाला 60 फीसदी चंदा कारपोरेट्स का है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस बार 956 करोड़ रुपए 5 पार्टिंयों को कारपोरेट्स से मिले। इसमें से 705 करोड़ बीजेपी व 198 करोड़ कांग्रेस को मिले हैं। इस पैसे से चुनाव लड़कर सरकार बनाई है तो कीमत तो चुकानी ही होगी।

उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य है कि पिछले 30 साल में आम आदमी के एसेट्स में मात्र 1 फीसदी बढ़ोतरी हुई है, जबकि नेताओं और कारपोरेट्स के एसेट्स सैकड़ों गुना ब-सजय़े हैं। आज देश की 64 प्रतिशत आबादी के पास केवल एक प्रतिशत एसेट्स हैं और 13 फीसदी लोगों के पास देश के 78 प्रतिशत एसेट्स आ गए हैं। सरकार को विकास विरोधी करार देते हुए उन्होंने कहा कि किसानों के कर्ज माफ करने की बात पर सवाल उठते हैं और कारपोरेट्स के अरबों के कर्ज माफ होने पर कोई चर्चा नहीं। वर्तमान पत्रकारिता और सोशल मीडिया के सवाल पर त्रिवेदी ने कहा कि पहले जनता को प्रभावित करने के लिए नेता पत्रकार को सैट करते थे। अब जनता सोशल मीडिया को सच मानती है तो हर पार्टी ने
सैकड़ों लोगों की टीम लगाकर फेक आइडेंटिटी के साथ -हजयूठ के पुलिंदे चलाना शुरू कर दिया है। रोज तय होता है कि आज जनता में क्या चलाना है और सामने वाले का क्या काउंटर करना है। पहले लोग अखबार में छपी खबर का भी जल्दी से यकीन नहीं करते थे और अब एक -हजयूठ को इतनी बार चलाया जाता है कि लोग उस पर बिना दिमाग लगाए यकीन कर रहे हैं। संवाद कार्यक्रम के प्रथम सत्र में जस्टिस विनोद शंकर दवे ने वरिष्ठ पत्रकार श्याम माथुर से चर्चा करते हुए पत्रकारिता, राजनीतिक व्यवस्था और आमजन पर विस्तार से वर्तमान हालात पर पीड़ा जताई। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी, पं. नेहरू, सरदार पटेल आदि के योगदान को भुलाया जा रहा है, जबकि इनके योगदान अभूतपूर्व रहे हैं। आरोप लगाए जाते हैं कि पं. नेहरू ने सरदार पटेल को नहीं जीतने दिया। जबकि वास्तविकता ये है कि मोतीलाल नेहरू के गंभीर बीमार होने से परिस्थितियां बनी, जिससे पटेल ने खुद नाम वापस ले लिया। खुद नेहरू लिखते हैं कि उनसे काबिल व्यक्ति पटेल थे और पता नहीं अब वे नई जिम्मेदारी संभाल पाएंगे या नहीं। जस्टिस दवे ने महात्मा गांधी की पत्रकारिता का जिक्र करते हुए कहा कि ट्रायल ऑफ गांधी पुस्तक प-सजय़े ंतो पता चलता है कि गांधी जी की लेखनी का जनांदोलन में कितना गहरा योगदान था। उन्होंने कहा कि व्यक्ति पूजा हमारी परम्परा रही है। आज भी ऐसा होता आ रहा है। देवी देवताओं और नेताओं की भक्ति होती है, जबकि भगवान तो सर्वव्यापी है और हर व्यक्ति मैसेंजर ऑफ गॉड है। यदि व्यक्ति पूजा से उपर उठंे तो कुछ भला हो सकता है।

सभी अतिथियों ने संवाद के अनूठे कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसा कार्यक्रम होते रहने चाहिए। इस पर कौंसिल ऑफ जर्नलिस्ट्स के प्रदेश अध्यक्ष अनिल त्रिवेदी ने कहा कि उनका प्रयास है कि वर्तमान पी-सजय़ी के पत्रकार साथियों को वरिष्ठ साथियों को पूर्ण मार्गदर्शन मिलता रहे। ऐसे कार्यक्रम निरंतर होंगे। साथ ही डॉ.वैदिक, विजय त्रिवेदी व जस्टिस दवे का आभार जताया कि उन्होंने शॉर्ट
नोटिस पर उनका निमंत्रण स्वीकार किया और सभी का उत्तम मार्गदर्शन किया।

कार्यक्रम संयोजक एवं वरिष्ठ पत्रकार योगेश शर्मा ने संचालन करते हुए सभी अतिथियों का विस्तार से परिचय कराया तथा कार्यक्रम की विस्तार से जानकारी दी। कौंसिल ऑफ जर्नलिस्ट्स के संरक्षक धीरेन्द्र जैन ने अतिथियों का स्वागत करते हुए अपने पत्रकारिता के संस्मरण ताजा किए। इस अवसर पर अतिथियों का पुष्प गुच्छ भेंट कर, शॉल ओ-सजय़ाकर व स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विभिन्न संस्थानों के पत्रकार, संवाददाता, छायाकार उपस्थित थे।

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